बहुत लाजवाब और खुबसूरत लिखती है आप
साक्छात सरस्वती लबो से बोलती पृतीत होती है
पठानकोट की सैनिक गाथा शब्दो मे छवि पृकट होती है
माँ के नाम संदेशा फिर पत्नि बहन बेटी बेटा का हाल बताती है
थमते नही अश्क आँखो से सैलाभे अश्क जगाती है
तुम्हारी अमृत सम अनुपम कृति पूनम दिल को सरेशाम जगाती है
साक्छात सरस्वती लबो से बोलती पृतीत होती है
पठानकोट की सैनिक गाथा शब्दो मे छवि पृकट होती है
माँ के नाम संदेशा फिर पत्नि बहन बेटी बेटा का हाल बताती है
थमते नही अश्क आँखो से सैलाभे अश्क जगाती है
तुम्हारी अमृत सम अनुपम कृति पूनम दिल को सरेशाम जगाती है
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