Friday, 29 April 2016

बहुत लाजवाब और खुबसूरत लिखती है आप

बहुत लाजवाब और खुबसूरत लिखती है आप
साक्छात सरस्वती लबो से बोलती पृतीत होती है
पठानकोट की सैनिक गाथा शब्दो मे छवि पृकट होती है
माँ के नाम संदेशा फिर पत्नि बहन बेटी बेटा का हाल बताती है
थमते नही अश्क आँखो से सैलाभे अश्क जगाती है
तुम्हारी अमृत सम अनुपम कृति पूनम दिल को सरेशाम जगाती है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव