Saturday, 9 April 2016

दिल के उपवन में मोहब्बत के फूल खिलायें नही जाते खुद ब खुद खिल जाते है

दिल के उपवन में
मोहब्बत के फूल
खिलायें नही जाते
खुद ब खुद खिल जाते है
रब दी इबादत होती है मोहब्बत
आशिक रब दा पैगामें
मोहब्बत ले धरा पे आते हैं
ये आशिक मिलायें नही जाते
खुद ब खुद मिल जाते है.
रब दा पैगामें मोहब्बत
जहाँ को देते है
और रूख्सत हो जाते है
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