Saturday, 14 May 2016

बेशक अपनी हर चीज़ " दोस्त "


बेशक अपनी हर चीज़ " दोस्त " के लिए क़ुर्बान करदो .. लेकिन .. किसी चीज़ के लिए अपने " दोस्त " को कुर्बान मत करना

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव