Friday, 13 May 2016

तेरी गलियों की डगर दिल को भाने लगी है

तेरी गलियों की डगर दिल को भाने लगी है
ख्वाबों और ख्यालों में भी तू ही नजर आने लगी है
तेरे आने की आहट का अहसास मादक हवा दिलाने लगी है
अब तो मेरे हमदम हरेक संय में तू ही तू नजर आने लगी है
पल पल हरेक पल तेरी याद सनम सताने लगी है
जिन्दगी में तेरी जरूरत हद से ज्यादा नजर आने लगी है
दिली ख्वाहिश और आरजुये जिन्दगी है मेरे
हरेक पल जिन्दगी ये खुबसूरत अहसास दिलाने लगी है
तेरी महक से महकती है कायनात और फिजा रब दी
मेरी जिन्दगी को महका दे तेरी याद ख्वाबगाह में भी सताने लगी है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव