Tuesday, 17 May 2016

तूही दर्दे दिल है सनम

तूही दर्दे दिल है सनम

तूही दर्दे दिल है सनम
दिली अहसास भी तूही है
धडकन है दिल की मेरे
एक चाहत एक प्यास भी तूही
मै जिस्म तूही रूह पिया
तुझ बिन धडके कैसे जिया
तुझ बिन लागे न मोरा हिया
अब तो आजा बलम परदेशियाँ
ऐक तेरी मोहब्बत मे धडके जिया
अब तो आजा बलम परदेशियाँ
तुझसे दूरी का अहसास हमको पिया
फिर भी न माने पागल हिया
तेरी चाहत तेरी मोहब्बत आरजुये जिन्दगी
तेरी उल्फत बनी सबब ए मोहब्बत

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव