करते है परवाज परिन्दे
करते है परवाज परिन्दे
आजाद फिजा मे
मचलते है परिन्दे
आजाद फिजा मे
साँझ ढले लौटते है
परिन्दे
अपने जहाज पर
आजाद फिजा से
आजाद फिजा मे
मचलते है परिन्दे
आजाद फिजा मे
साँझ ढले लौटते है
परिन्दे
अपने जहाज पर
आजाद फिजा से
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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