Tuesday, 17 May 2016

बीती शब ख्वाबगाह मे मेहबूब से मुलाकात हो गइ

बीती शब ख्वाबगाह मे मेहबूब से मुलाकात हो गइ

बीती शब ख्वाबगाह मे मेहबूब से मुलाकात हो गइ दिल ही दिल मे दिल से दिल की हरेक बात हो गई अमावस्या के पखवाडे मे चांदनी रात हो गई सावन के सुहाने मौसम मे महबूब से मुलाकात हो गई

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव