Sunday, 8 May 2016

बन के परिन्दा

बन के परिन्दा उनमुक्त गगन का परवाज करूँ
उनमुक्त बन में रास परिहास करू
कुदरत की बाहों में खेलूँ
मस्त फिजा में झूँमू जिन्दगी
महबूबे मोहब्बत की मानिंद तुझसे प्यार करूँ
पृियतमा की मानिंद तुझपे एतबार करूँ

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव