Sunday, 19 June 2016

२१६ मेरी आधुनिक मधुशाला

२१६  मेरी आधुनिक मधुशाला


तेरे जिस्म की मादक खुशबु मय जिस्म तेरा मेरी मधुशाला
तेरे हुस्न की दरिया में खुद को मैंने डुबो डाला मेरी मधुशाला
तेरे मादक लबो से अविरल टप टप टपकी हाला मेरी मधुशाला
साड़ी कायनतो फ़िज़ा महकती तुझसे रूपसी बाला मेरी मधुशाला  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव