Monday, 13 June 2016

पढाव

जारी है जिन्दगी का सफर
कई पड़ाव आये
बचपन बीता खेलकूद और पढ़ाई मे
जवानी ने अनेकानेक रंग दिखाये
फुर्र हो गई पल दो पल मे जैसे बसंत
तीसरे गेयर मे क्या क्या रंग दिखायेगी
अनेकानेक वात्सल्य मोह तृष्णा से भेंट करायेगी
चौथे गेयर का सफर बहुत मुश्किल होगा या नही
आमी जाने ना

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव