Sunday, 19 June 2016

१०९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



सुनामी से तीक्ष्ण अल्फाज जिगर से निकले
रवि की तीक्ष्ण दृष्टी की तपिस से बनी हाला
मेरे महबुबे मोहब्बत के कोमल कर से ही
आज पियूँगा दिव्य अनुपम अमृतसम हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव