२१० मेरी आधुनिक मधुशाला
सदियों की प्यास बुझेगी पीकर सागरमय अमृतसम मादक हाला
परदेशी अंजान डगर जिस पल पहुंचेगा मेरी आधुनिक मधुशाला
सर के बल कृतक अंजान डगर नाचूंगा पी रूपसी की यौवन हाला
सारा जहां सर झुकाएगा पीके सुरबाला के लबो से टपकती हाला
सदियों की प्यास बुझेगी पीकर सागरमय अमृतसम मादक हाला
परदेशी अंजान डगर जिस पल पहुंचेगा मेरी आधुनिक मधुशाला
सर के बल कृतक अंजान डगर नाचूंगा पी रूपसी की यौवन हाला
सारा जहां सर झुकाएगा पीके सुरबाला के लबो से टपकती हाला
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