Wednesday, 15 June 2016

०९० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



नित पाठक जब जाते सायबर कैफे पाते अनुपम मादक हाला
मुफत बैठकर जी भरके पीते सागरमय अमृतसम मादक हाला
मेरी प्रितमा मेरी मोहब्बत रूपसी कमसिन अल्हड सुरबाला
कृतक अंजान डगर नित लबों  से पीते यौवनरस मादक हाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव