१८९ मेरी आधुनिक मधुशाला
मेरी मोहब्बत अनुपम कृति नित कहती मुझसे ले पीले हाला
अमृतसम सागरमय अनुपम जन्नते हूर रूपसी बाला की हाला
जब जब शब्दों की सुनामी आती कृतक रुख है करता मधुशाला
पाठकों की इबादत हेतु निज गढ़ता अनुपम कृति बैठ मेरी मधुशाला
मेरी मोहब्बत अनुपम कृति नित कहती मुझसे ले पीले हाला
अमृतसम सागरमय अनुपम जन्नते हूर रूपसी बाला की हाला
जब जब शब्दों की सुनामी आती कृतक रुख है करता मधुशाला
पाठकों की इबादत हेतु निज गढ़ता अनुपम कृति बैठ मेरी मधुशाला
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