Wednesday, 15 June 2016

०८८- मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


झुमके बाला बोली मुझसे परम प्रिय मुझको तेरी आधुनिक मधुशाला
तेरी कहु या कहु हमारी शब्दों की सुनामी सम लगती मादकतम हाला
साँझ  ढले नित सजती डगर मेल सा लगता मेरी आधुनिक मधुशाला
कृतक अंजान कत्थक नित करता बैठ पिरोता मादक शब्दों की माला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव