Tuesday, 14 June 2016

१८७ मेरी आधुनिक मधुशाला

१८७  मेरी आधुनिक मधुशाला

यम आया है साकी बनकर आज मेरी आधुनिक मधुशाला
उमड़ घुमड़ के बिजुरिया चमक रही मेघो से टपकरही हाला
यारो संग बैठ पिएगा सुरबाला की सागरमय मादक हाला
टल्ली होकर खुद को भुला बैठेगा मौत का ठेकेदार निराला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव