१८७ मेरी आधुनिक मधुशाला
यम आया है साकी बनकर आज मेरी आधुनिक मधुशाला
उमड़ घुमड़ के बिजुरिया चमक रही मेघो से टपकरही हाला
यारो संग बैठ पिएगा सुरबाला की सागरमय मादक हाला
टल्ली होकर खुद को भुला बैठेगा मौत का ठेकेदार निराला
यम आया है साकी बनकर आज मेरी आधुनिक मधुशाला
उमड़ घुमड़ के बिजुरिया चमक रही मेघो से टपकरही हाला
यारो संग बैठ पिएगा सुरबाला की सागरमय मादक हाला
टल्ली होकर खुद को भुला बैठेगा मौत का ठेकेदार निराला
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