आँखों का होना सफल मैं मान लूँ गर दीदारे यार हो जाये
माथे का होना सफल मै मान लूँ
गर तेरी चरण रज माथे पे आयें
मुख का होना सफल मैं मान लूँ
गर जुबाँ पे हर घडी साँवरिया नाम आयें
मन का होना सफल मैं मान लूँ
गर तेरी साधना मे वो रम जाये
नासिका का होना सफल मैं मान लूँ
गर कायनात में महक तेरी वो पाये
हाथों का होना सफल मैं मान लूँ
गर तेरी साधना में दोनो जुड जायें
पैरों का होना सफल मैं मान लूँ
गर तेरे दीदार को त्रिकुट पर्वत जो चढ जायें
अपना जनम धन्य मैं मान लूँ गर हरिनाम सुमिरन में जो रम जाये
दिल का होना सफल मैं मान लूँ
तेरी मोहब्बत में कुर्बान गर जाये
जनम सफल मैं मान लूँ
गर अपनी बाहों में भरके सुदामा सम दिल से लगायें
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Friday, 24 June 2016
अगर तुम मिल जाओ, जनम सफल हो जाये
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