Friday, 24 June 2016

अगर तुम मिल जाओ, जनम सफल हो जाये

आँखों का होना सफल मैं मान लूँ गर दीदारे यार हो जाये
माथे का होना सफल मै मान लूँ
गर तेरी चरण रज माथे पे आयें
मुख का होना सफल मैं मान लूँ
गर जुबाँ पे हर घडी साँवरिया नाम आयें
मन का होना सफल मैं मान लूँ
गर तेरी साधना मे वो रम जाये
नासिका का होना सफल मैं मान लूँ
गर कायनात में महक तेरी वो पाये
हाथों का होना सफल मैं मान लूँ
गर तेरी साधना में दोनो जुड जायें
पैरों का होना सफल मैं मान लूँ
गर तेरे दीदार को त्रिकुट पर्वत जो चढ जायें
अपना जनम धन्य मैं मान लूँ गर हरिनाम सुमिरन में जो रम जाये
दिल का होना सफल मैं मान लूँ
तेरी मोहब्बत में कुर्बान गर जाये
जनम सफल मैं मान लूँ
गर अपनी बाहों में भरके सुदामा सम दिल से लगायें

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव