Wednesday, 29 June 2016

११८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


महबुब के रुखसार के नूर से दमकती मेरी आधुनिक मधुशाला
कानों की नर्मो नाजुक लो को चूमता दककता स्वर्णिम बाला
ज्यो झरनों से अविरल कल कल छल छल जल बहता रहता
मेरी आधुनिक मधुशाला में टपकती अमृतसम मादक हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव