Wednesday, 29 June 2016

११९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



मोहब्बत में झूमते भंवर ने कुमुदनी के मादक लबो को चूमा
यु लगा उसे जैसे उसने आज पि ली अमृतसम अनुपम हाला
जन्नते हूर के लबो से पि हाला झूम उठा चंचल मन मतवाला
मेरी मधुशाला की बाला के नूर से जन्नत सैम लगती मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव