मा की ममता में
परमात्मा का दीदार होता
बरबस बरसती ममता ही तो
परमपिता परमात्मा का
साक्छातकार होता है
ममता मई माँ
परमात्मा स्वरूप
दिल से
नि: स्वार्थ
बरसती है मोहब्बत
यहीं तो उसका दीदार होता है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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