Thursday, 16 June 2016

९१- मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



कुदरत का कुशल चितेरा पन्त जी बन साकी आया मेरी मधुशाला
सप्त रंगी इंद्रधुनुषी अनुपम प्याले से छलकती महुये की मादक हाला
जिस हाला की मादक महक ने कयनातो फ़िज़ा का समां बदल डाला
जिसे पीकर मस्त हुये कृतक मनोहर अंजान डगर मेरी मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव