Thursday, 16 June 2016

१९२ मेरी आधुनिक मधुशाला

१९२  मेरी आधुनिक मधुशाला

पेरिस का महान चित्रकार डेविस बन साकी आया मेरी मधुशाला
अपने अनुपम चित्रकारी के दिव्य प्यालो में भर सबको पिलाता हाला
नाना भाँती की दिव्य रंगीं हालाओ ने परदेशियों पे ऐसा  जादू डाला
मेरी आधुनिक मधुशाला में आक परदेशी ने खुद को हाला में डुबो डाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव