मेरी आधुनिक मधुशाला
आज पियूँगा जी भरके तेरी यौवनरस मादक हाला मेरी मधुशाला
रूपसी अल्हड सुरबाला के लबों से सतत छलकती मादक हाला
बाला की सागरमय मादक ने तन मन पे कुछ ऐसा जादू है डाला
कृतक अजान डगर हो गये बाँवरे सारे जहां को पल में भुला डाला
आज पियूँगा जी भरके तेरी यौवनरस मादक हाला मेरी मधुशाला
रूपसी अल्हड सुरबाला के लबों से सतत छलकती मादक हाला
बाला की सागरमय मादक ने तन मन पे कुछ ऐसा जादू है डाला
कृतक अजान डगर हो गये बाँवरे सारे जहां को पल में भुला डाला
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