छककर आज पियूँगा तेरी सागरमय अनुपम मादक हाला
मई परदेशी अंजान डगर से आज हु आया मेरी मधुशाला
सागरमय हाला ने परदेशी के दिल पर कुछ ऐसा जादू डाला
जहाँ कही नज़र परदेशी है जाती नज़र आती मेरी मधुशाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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