Saturday, 11 June 2016

१७५ मेरी आधुनिक मधुशाला

१७५   मेरी आधुनिक मधुशाला

रात ढले कृतक बन साकी आ पहुँचा मेरी आधुनिक मधुशाला
मादक हाला को सरपट दौड़ते देखा एक प्याले से दूजे प्याला
यौवन रस हाला को मचलते देखा मेरी  आधुनिक मधुशाला
मेरी मधुशाला के चौबारे मचल रहा था चाँद लिए मादक प्याला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव