१७४ मेरी आधुनिक मधुशाला
सदियों से है बपौति हमारी मेरी आधुनिकतम मधुशाला
जनम जन्म कृतक मनोहर पहुंचता डगर मेरी मधुशाला
वाही रूपसी प्रियतमा कृतक पाता जन्नते हूर सुरबाला
झूम उठता तन मन यारों जब कर में पाता मादक हाला
सदियों से है बपौति हमारी मेरी आधुनिकतम मधुशाला
जनम जन्म कृतक मनोहर पहुंचता डगर मेरी मधुशाला
वाही रूपसी प्रियतमा कृतक पाता जन्नते हूर सुरबाला
झूम उठता तन मन यारों जब कर में पाता मादक हाला
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