Saturday, 11 June 2016

१७४ मेरी आधुनिक मधुशाला

१७४    मेरी आधुनिक मधुशाला

सदियों से है बपौति हमारी मेरी आधुनिकतम मधुशाला
जनम जन्म कृतक मनोहर पहुंचता डगर मेरी मधुशाला
वाही रूपसी प्रियतमा कृतक  पाता जन्नते हूर सुरबाला
झूम उठता तन मन यारों जब कर में पाता मादक हाला
  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव