१७३ मेरी आधुनिक मधुशाला
राजा को है रंक बनाती जब अपनी पे आती रूपसी बाला
तनमन सबकुछ अर्पण कर देती हाथ से भर भर प्याला
प्याला की मादक हाला में खुद है डुबोता हाला पीनेवाला
होश में जब वो आता हाथ में उसके होता रीता हाला का प्याला
राजा को है रंक बनाती जब अपनी पे आती रूपसी बाला
तनमन सबकुछ अर्पण कर देती हाथ से भर भर प्याला
प्याला की मादक हाला में खुद है डुबोता हाला पीनेवाला
होश में जब वो आता हाथ में उसके होता रीता हाला का प्याला
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