Friday, 17 June 2016

१०४- मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


मेरी मधुशाला की डगर निकालता परदेशी अंजान डगर पीने हाला
बगैर किसी भ्रम के हरेक डगर हरेक मोड़ पे पाता मेरी मधुशाला
अलग अलग राह से पीने वाले रूपसी बाला की सागरमय हाला
चाहे किसी भी डगर से आ हरेक मोड़ पे तेरी राह तकती मधुशाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव