मेरी मधुशाला की डगर निकालता परदेशी अंजान डगर पीने हाला
बगैर किसी भ्रम के हरेक डगर हरेक मोड़ पे पाता मेरी मधुशाला
अलग अलग राह से पीने वाले रूपसी बाला की सागरमय हाला
चाहे किसी भी डगर से आ हरेक मोड़ पे तेरी राह तकती मधुशाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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