Thursday, 23 June 2016

तुम मोहब्बत हो हमारी

तुम मोहब्बत हो हमारी
इबादते हुस्न दिन रात करता हूँ
तेरे दर ये बंदा मोहब्बत की फरियाद करता हूँ
आया हूँ तेरे दर मोहब्बत पाके जाउँगा
गर तू न मिली तेरे दर पे जाँ अपनी लुटाउँगा
तेरी मोहब्बत में जियुँगा तेरी मोहब्बत में जाँ लुटाउँगा
गर इस जनम न मिली हरेक जनम तेरी मोहब्बत की खातिर धरा पे आउँगा
माँग लूँगा रब से मोहब्बत हो हमारी
तेरी मोहब्बत हमें जिन्दगानी से प्यारी
तेरी मोहब्बत में हरेक हद से गुँजर जाउँगा
तुझे पा मोहब्बत का परचम इस जहाँ में लहराउँगा

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव