बरखा की रिमझिम फुहार ने
किया कुदरत का अद्भुद सिंगार है
आज हर्दय में उठती हिलोर है
तन मन में चढता ज्वार है
बागों मे म्युर नृत्य ने किया कुदरत का सिंगार है
आशिकों के तन मन में आज उमडता ज्वार है
बरखा की पहली फुहार ने किया कुदरत का सिंगार है
महबूबे मोहब्बत गाज से डरके बाहों में सिमटी हमार है
ए इन्दृ तेरा दिली शुकृिया तूने जीता जियरा हमार है
पपीहे की पीहू पीहू राम प्यासो दिल की बैचेनी बढात है
एसे मे मनवा मचलत पिय याद आवत बार बार है
गाज गर्जन के बाद की रौशनी बहुत भावत हमार है
जियरा मे हूलुक उठत पति देव की याद सतावत हमार है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Thursday, 23 June 2016
बरखा की रिमझिम फुहार
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
-
कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
-
जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
-
रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
No comments:
Post a Comment