तेरी डगर निहारत रैन भई
लुट गवा मनवा का चैन हमार है
अब तो आजा बेदर्दी बलमवा
कोई पुरवाई छेडत जियरा के तार है
तेरे बगैर बेदर्दी बैरन हुई गइल निंदिंया हमार है
साँस भी बिरहन साथ नही होडत
तडपत देह हमार है
तेरी मोहब्बत में बेजान बलमवाँ
होई गइल जिस्मवा हमार है
अब तो लौट का आजा परदेशी बलमवाँ खोई खोई रहत जियरा हमार है
तेरी मोहब्बत और चाहत में बैरन हुई गइल चाँदनी यार है
अब तो आजा बलम परदेशी तडप रही तोरी महरारू यार है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Thursday, 23 June 2016
तेरी डगर निहारत रैन भई
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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