Thursday, 16 June 2016

९९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



धुत्कार लगाईं पंडित ने मुझको कहकर शराबी मदिरा पीने वाला
ठुकराया मौलवियों ने मुझको देख हाथ में दिव्य शराब का प्याला
गन्दी नाली का कीड़ा कहकर ठुकराया मुझे समाज के ठेकेदारों ने
मैंने अपनी मंजिल पाई अंजान डगर चल मेरी आधुनिक मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव