Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा,
चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 5 June 2016
०१६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
टप टप टपटप रूपसी के अंग अंग से सतत टपकती अनुपम हाला पीकर परदेशी अंजान मचलता जन्नते हूर के यौवनरस का प्याला पल पल बीते आंखें मलता कही कोई ख्वाब तो नहीं मतवाला अंतत: झूम उठता परदेशी अंजान डगर पीकर बाला की मादक हाला
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