Sunday, 5 June 2016

०१६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



टप टप टपटप रूपसी के अंग अंग से सतत टपकती अनुपम हाला 
पीकर परदेशी अंजान मचलता जन्नते हूर के यौवनरस का प्याला 
पल पल बीते आंखें मलता कही कोई ख्वाब तो नहीं मतवाला 
अंतत: झूम उठता परदेशी अंजान डगर पीकर बाला की  मादक हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव