मोहब्बत अब व्यापार हो गई है
आज नगद कल उधार हो गई है
सौदागरों का शाया हो गई है मोहब्बत
गुदडी के लालों से बिदक कर खडी हो गई है मोहब्बत
मोहब्बत बे-हया आज हो गई है
राम को भुलाकर रावन के आगोश में खो गई है
जमाने की रूसराईयो से बे- परवाह हो गई है
मुझे फकीरी का उलाहना देकर अमीर की हो गई है
मोहब्बत आज जवाँ हो गई है
रस रंग के माहौल में खो गई है
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