Thursday, 30 June 2016

मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत , आज क्या से क्या हो गई है ,

मोहब्बत अब व्यापार हो गई है
आज नगद कल उधार हो गई है

सौदागरों का शाया हो गई है मोहब्बत
गुदडी के लालों से बिदक कर खडी हो गई है मोहब्बत

मोहब्बत बे-हया आज हो गई है
राम को भुलाकर रावन के आगोश में खो गई है

जमाने की रूसराईयो से बे- परवाह हो गई है
मुझे फकीरी का उलाहना देकर अमीर की हो गई है

मोहब्बत आज जवाँ हो गई है
रस रंग के माहौल में खो गई है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव