Friday, 10 June 2016

तेरे हरेक गम को

तेरे हरेक गम को अपना गम बना लूँगा
तेरे हरेक दर्द को दिल मे अपने बसा लूँगा
आशियाना ए दिल में बसाके तेरी हसीन यादें
अनु दिल के कैदखाने में ता उमृ मोहब्बत की सजा दूँगा

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव