Tuesday, 21 June 2016

तू तो पागल है

तू पागल है
मोहब्बत में हरेक इल्जाम मुझपे लगाती है
तुझे देख हया भी शर्मा कर भाग जाती है
तू उस औरत पे इल्जाम लगाती है जो पाक है
रब की बंदी जरा शर्म कर परवरदिगार के कहर से डर
अपने बच्चों की कुछ फिकर तू कर
उमृ के इस पडाव पे जिन्दगानी को शर्माने पर मजबूर तू कर
जाने किस बात का गुरूर तू करती है
आखिर क्यो गर्व तू करती है अब भी समय है अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन तू कर
मोहब्बत को नाहक इल्जाम न दे रब के कहर से तू डर

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव