तू पागल है
मोहब्बत में हरेक इल्जाम मुझपे लगाती है
तुझे देख हया भी शर्मा कर भाग जाती है
तू उस औरत पे इल्जाम लगाती है जो पाक है
रब की बंदी जरा शर्म कर परवरदिगार के कहर से डर
अपने बच्चों की कुछ फिकर तू कर
उमृ के इस पडाव पे जिन्दगानी को शर्माने पर मजबूर तू कर
जाने किस बात का गुरूर तू करती है
आखिर क्यो गर्व तू करती है अब भी समय है अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन तू कर
मोहब्बत को नाहक इल्जाम न दे रब के कहर से तू डर
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 21 June 2016
तू तो पागल है
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