Saturday, 18 June 2016

१०७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



मस्तानी अदा बाला से लेकर मैंने आज तजि सागरमय हाला
मादकता दिव्य  प्याले से लेके मैंने छोड़ दिया आलौकिक प्याला
जन्नते हूर सम साकी बाला से मिल मैं अपना सब कुछ भूलगया 
मधुशाला की फ़िज़ा कुछ ऐसा उलझा अपनापन भी यारों भूल गया


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव