Saturday, 18 June 2016

१०६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


हाला पिने से शांत है होती परदेशी के अंतर्मन की ज्वाला
मन के दर्पण में नित्य  है दिखता हाला  अनुपम प्याला
मधुशाला वह जगह  है यारो जहाँ रूपसी हाला पिलाती
कभी नज़रों  से टपकती हाला कभी पिलाती लबो से बाला


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव