Sunday, 19 June 2016

२१२ मेरी आधुनिक मधुशाला

२१२ मेरी आधुनिक मधुशाला

मधुशाला में पैदा हुआ मधुशाला ने यारो मुझको है पाला
पहले पहल जब नींद खुली खुदको मैंने पाया मधुशाला
नस नस में बसी मादक महक बन यारो रूपसी सुरबाला
बाला की अमृतसम मादक हाला ने जीवन जन्नत बना डाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव