Sunday, 19 June 2016

११३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



सुरबाला के जिस्म की खुशबू से महक रही मेरी आधुनिक मधुशाला
बाला के हुस्न के जादू ने मधुशाला की पताका को विश्व विजयी बन डाला
सारा जहां झूमने  पीकर रूपसी विश्व मोहिनी की अमृतसम हाला
रूपसी की सागरमय ने कृतक अंजान डगर को अपने बस कर डाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव