Sunday, 19 June 2016

२१४ मेरी आधुनिक मधुशाला

२१४  मेरी आधुनिक मधुशाला


तेरी मधुर मुस्कान से तन मन डोला मेरी आधुनिक मधुशाला
कभी जागा जागा सा कभी रहा खोया खोया मेरी मधुशाला
तेरी मादक स्वर लाहिरी ने तान ने तेरा महबूब मुझे बनाया
मैंने खुद को भुलाया यारो जिस दिन मैंने पी  हाला मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव