२१४ मेरी आधुनिक मधुशाला
तेरी मधुर मुस्कान से तन मन डोला मेरी आधुनिक मधुशाला
कभी जागा जागा सा कभी रहा खोया खोया मेरी मधुशाला
तेरी मादक स्वर लाहिरी ने तान ने तेरा महबूब मुझे बनाया
मैंने खुद को भुलाया यारो जिस दिन मैंने पी हाला मधुशाला
तेरी मधुर मुस्कान से तन मन डोला मेरी आधुनिक मधुशाला
कभी जागा जागा सा कभी रहा खोया खोया मेरी मधुशाला
तेरी मादक स्वर लाहिरी ने तान ने तेरा महबूब मुझे बनाया
मैंने खुद को भुलाया यारो जिस दिन मैंने पी हाला मधुशाला
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