मेरी महबूबे मोहब्बत
बहुत प्यारी लगती है
सुकुमारी रब दा करिश्मा दुलारी लगती है
शबनमी मोतियों की सी सुकुमारी लगती है
सावन की रिमझिम फुहारों की प्यारी लगती है
जिन्दगी की मंजिल राजकुमारी लगती है
मंजिल की डगर मोहब्बत हमारी लगती है
दिल में बसी धडकने दिल रूह हमारी लगती है
जन्नते हूर रंभा से प्यारी जानम हमारी लगती है
महबूबे मोहब्बत के रूखसार से रौशन ये कायनात लगती है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Friday, 10 June 2016
मेरी महबूबे मोहब्बत
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
-
कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
-
मोहे पनघट पे नंदलाल की याद सतावे सखी याद सतावे बडा तडपावें सखी नींद न आवे नंदबाबा को लाडलों कान्हा यशोमति को दुलारों देवकी वसुदेव को नन्हो...
No comments:
Post a Comment