Sunday, 5 June 2016

०१८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे को भुलाता एक बार जो आता मधुशाला
अपना पावन धर्म मानवता को बनाता एक बार जो पीता प्याला
रूपसी बाला  की छवि को दिल में बसता जो आता मेरी मधुशाला
जात पांत का भेद भुलाता पीकर सागरमय अमृतसम मादक हाला 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव