Sunday, 5 June 2016

०१९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



मादक लबों से जिसने कभी न चखी अनुपम  मादकतम हाला
अपने नर्मो नाजुक कोमल करो से कभी न छुआ मादक प्याला
रम्भा सम साकी से लजाकर कभी न मांगी सागरमय हाला
दुनिया के रिश्ते नातो  से लजा न छुआ जिसने मादक प्याला
आज वो कृतक अंजान डगर है आया मेरी आधुनिक मधुशाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव