पंडित मुल्ला ग्रन्थि और काजी बने पुजारी रूपसी साकी बाला
माला फेरत फेरत आ पहुँचे मेरी आधुनिक तम ई - मधुशाला
बाला की सागरमय हाला मंत्र बनी तंत्र बना अनुपम प्याला
कृतक बन बैठा राम की प्रतिमा मंदिर बन गई मेरी-मधुशाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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