Sunday, 5 June 2016

०२१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



मंदिरों में बज रही घंटियाँ और चढ़ रही राम पर अनुपम माला
मस्जिदों में अजान गूंज रही गुरुद्वारो में गुरु की पावन वाणी
सांझ ढले पंडित मुल्ला और ग्रंथि ने मन में एक ही बात है ठानी
हमने हर हाल में जानी मेरी आधुनिक मधुशाला की डगर सुहानी 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव