Sunday, 5 June 2016

०२२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



सदा बुराई पाएगा जग में दिव्य अनुपम मादकतम  प्याला
अंजान डगर नित आएगा परदेशी मेरी आधुनिक मधुशाला
रूपसी परी की सागरमय पीकर खुद को भुलायेगा मतवाला
कभी न लौट कर फिर वह जाएगा अजनबी हाला पीनेवाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव