चाहे क़यामत आये धरा पर रहे न कोई मादक हाला पीने वाला
तब भी धरा पर अमर अडिग रहेगी मेरी आधुनिक ई मधुशाला
फिर फिर धरती पर आएगा मानव अंजान डगर से मधुशाला
दिल भरके फिर से पिएगा मानव गुंजायमान होगी मधुशाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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