Sunday, 5 June 2016

०२४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



पंडित मुल्ला ग्रंथि क़ाज़ी सभी बन गए मोहब्बत में साकी
मेरी आधुनिक ई मधुशाला बन गई मादक तम देवाला
 बन गई दिनचर्या रूपसी की अमृतसम मादकतम हाला
कृतक अंजान बन गया पुजारी धूम मचाती मेरी मधुशाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव