सरमायादारों की जागीर लुट नहीं रहा न कोई रोने वाला
सारे महल खंडहर हो गए जहाँ कभी मचलती थी बाला
जहा सागरमय अविरल थी बहती और टकराते प्याले
सुनसान खण्डहरो में रूह कपकपाती चीखती कोई बाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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