Sunday, 5 June 2016

०२५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



सरमायादारों की जागीर लुट  नहीं रहा न कोई रोने वाला
सारे महल खंडहर हो गए जहाँ  कभी मचलती थी बाला
जहा सागरमय अविरल थी बहती और टकराते प्याले
सुनसान खण्डहरो में रूह कपकपाती चीखती कोई बाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव